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साच्ची बाता - एक भजन

साच्ची बाता - एक भजन

सदा साच्ची बाता लाईया   बूरे करिमों करिया नू ।
देव बोठे का लेईया आसरा   ओर कसी के डरिया नू ।।

कदी कसी की चोरी नू करिया    चुगली कसी की लाया नू ।
कदी कसी के धोखा नू देईया     झूठी कसिमा खाया नू  ।।
पाण्डवाणी धरती मेरी         बदनाम तू करिया नू ।
देवा महासू रा लेया आसरा   ओर कसी के डरिया नू  ।।

कदी बचन देई करी   पाच्छी मुकेरी जाया नू ।
कसी गरीब देखी करी   तैसी कदी सताया नू ।।
बुरै करिमौ छोडी देया   पाप गघैरी भरिया नू ।
देवा बोठे रा लिया आसरा   ओर कसी कै डरीया नू ।।

कदी कसी कै बडियाणों से   धन आपणों लुटाया नू ।
कदी कसी की तिरिया देखी   जिया आपणों डिगाया नू ।।
बीडी सूर सिगरट छोडिया     बिना मौती का मरिया नू ।
देवा बोठे रा लिया आसरा    ओर कसी के डरिया नू ।।

ज्ञान गुरु से लेई करी    ध्यान जियो दा लाया तू ।
साधु सन्तो की करिया सेवा  सतसंग के जाया तू ।।
देवताऊंरी भूमी मेरी    बदनाम तू करिया नू ।
चार महासू रा लिया नाम तू और कसी के डरिया नू ।।

सौजन्य से :  श्री महासू  देवता एक परिचय ( लेखक : श्री दिगम्बर सिहं तोमर )

  अमर शहीद वीर केसरी चन्द के अन्तिम शब्द

अमर शहीद वीर केसरी चन्द के अन्तिम शब्द


कहना मेरे बाप से  धीरज रखना आप ।
तेरे बेटे ने किया नही जुल्म या पाप ।।

नही किसी की चोरी की थी  ऐसा था मैं रंक नही ।
मरता हूँ मेैं देश धर्म पर  कुल को दिया कलंक नही ।।

बातो का अब वक्त न मेरे नेता की तुम जय कह दो ।
भारत नहीं गुलाम रहेगा  इतना तो तुम बिन भय कह दो ।।

फांसी का अब समय हुआ  फिर जै-जै  हिन्द पुकार कहो ।
मेरे भाई बहनो को तुम    जाकर मेरा प्यार कहो ।।

हाँ जब लाश जलाओ मेरी  इतना भूल न जाना जी ।
उस पर कपडा खद्दर रखना नही विदेशी लाना जी ।।

लेखक : पं० शिव राम